फर्जी हस्ताक्षर और मुहर लगाकर नियुक्ति पत्र तैयार करने का आरोप, होमगार्ड भर्ती में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से ठगी का मामला
इटावा/उत्तर प्रदेश। सरकारी नौकरी पाने का सपना देखने वाले युवाओं को अक्सर जालसाज अपने झांसे में लेकर ठगी का शिकार बना लेते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने कथित तौर पर फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार कर लोगों को नौकरी दिलाने का लालच देने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी के पास से आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक की चेकबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन, सिम कार्ड सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि आरोपी सरकारी विभागों और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोगों के बीच भरोसा पैदा करता था और नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे वसूलता था।
फर्जी हस्ताक्षर और मुहर से तैयार किए नियुक्ति पत्र
पुलिस के अनुसार आरोपी पर एसजीपीजीआईएमएस के निदेशक के कथित फर्जी हस्ताक्षर और मुहर का इस्तेमाल कर नियुक्ति पत्र भेजने का आरोप है। इतना ही नहीं, एक महिला को होमगार्ड परीक्षा में पास दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए गए।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को आरोपी की गतिविधियों से जुड़े कई दस्तावेज और अन्य सामान मिलने की बात सामने आई है। बरामद सामग्री के आधार पर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने कितने लोगों को इसी तरह नौकरी का झांसा दिया और कितने लोगों से पैसे लिए।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक 14 सितंबर की सुबह करीब 9:01 बजे मुखबिर से सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने भरथना अंडरपास के पास चेकिंग अभियान के दौरान आरोपी नवल किशोर को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाशी ली। तलाशी के दौरान उसके पास से कई पहचान और बैंकिंग दस्तावेज बरामद होने की बात कही गई है।
पुलिस के अनुसार बरामद सामान में—
आधार कार्ड
पैन कार्ड
ड्राइविंग लाइसेंस
केनरा बैंक की चेकबुक
एचडीएफसी बैंक के दो चेक
तीन एटीएम कार्ड
मोबाइल फोन
दो सिम कार्ड
शामिल हैं।
इसके अलावा पुलिस ने आरोपी के पास से 10 हजार रुपये नकद और एक अपाचे बाइक भी बरामद किए जाने की जानकारी दी है।
एसजीपीजीआईएमएस और भर्ती बोर्ड से जुड़े फर्जी दस्तावेज बरामद
पुलिस की कार्रवाई के दौरान केवल पहचान पत्र और बैंकिंग दस्तावेज ही नहीं मिले, बल्कि कई ऐसे कागजात भी बरामद होने की बात कही गई है, जो सरकारी भर्ती प्रक्रिया से संबंधित बताए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार आरोपी के पास से एसजीपीजीआईएमएस लखनऊ और उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की दो कथित फर्जी मुहरें, फार्मासिस्ट पद से संबंधित कथित कूटरचित नियुक्ति पत्र, होमगार्ड परीक्षा परिणाम से संबंधित फर्जी दस्तावेज, नौकरी के विज्ञापन और अन्य कागजात बरामद हुए हैं।
इन दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी होगा कि ये दस्तावेज कहां तैयार किए गए, इनमें किस तरह की मुहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया और इनके जरिए कितने लोगों को विश्वास में लिया गया।
युवाओं को नौकरी दिलाने का देता था लालच
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह पुलिस और होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया का फायदा उठाकर गांवों के युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का लालच देता था।
आरोप है कि वह नौकरी लगवाने के नाम पर युवाओं से फाइल शुल्क, दस्तावेजी प्रक्रिया और अन्य खर्चों के नाम पर पैसे अपने खाते में जमा करवाता था। इसके बाद कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करके उन्हें दे देता था।
नौकरी के संबंध में जब पीड़ित या अभ्यर्थी बार-बार फोन करते थे तो आरोपी कथित तौर पर मोबाइल बंद कर देता था या अपना नंबर बदल लेता था। पुलिस के अनुसार शक होने पर वह चेक देकर भरोसा बनाए रखने की कोशिश भी करता था।
यह तरीका इस बात की ओर इशारा करता है कि कथित आरोपी पहले लोगों के बीच भरोसा कायम करता था और उसके बाद उन्हें नौकरी के नाम पर आर्थिक नुकसान पहुंचाता था।
10 हजार रुपये भी ठगी की रकम में शामिल
पुलिस के अनुसार आरोपी के पास से बरामद 10 हजार रुपये नकद भी कथित ठगी की रकम में शामिल बताए गए हैं। हालांकि इस रकम का वास्तविक स्रोत और उससे जुड़े लेन-देन की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों और मोबाइल फोन की भी जांच कर सकती है, जिससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और किन लोगों से आर्थिक लेन-देन हुआ।
अगर बैंकिंग रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में लेन-देन सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
पहले से दर्ज हैं कई मुकदमे
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार नवल किशोर के खिलाफ पहले से भी कई मामले दर्ज बताए गए हैं। जानकारी के मुताबिक कन्नौज के सौरिख थाने में वर्ष 2024 में ठगी और विश्वासघात से संबंधित दो मुकदमे दर्ज हैं।
इसके अलावा वर्ष 2020 में मारपीट, छेड़छाड़, दहेज उत्पीड़न और धमकी से संबंधित मुकदमा दर्ज होने की बात भी सामने आई है। वहीं उसराहार थाने में भी आरोपी के खिलाफ वर्तमान में मुकदमा दर्ज किया गया है।
हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगी।
साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले में साइबर सेल और उसराहार पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की है। आधुनिक समय में फर्जी नियुक्ति पत्र, डिजिटल दस्तावेज और ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से होने वाली ठगी के मामलों में मोबाइल फोन और बैंक खातों की जांच काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।
पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच के जरिए आरोपी के संपर्कों का पता लगाने का प्रयास कर सकती है। साथ ही बैंक खातों और चेक से संबंधित जानकारी भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी से सावधान रहने की जरूरत
यह मामला उन युवाओं के लिए भी बड़ी चेतावनी है, जो सरकारी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे हैं। बेरोजगारी और नौकरी की तलाश के बीच कई बार अभ्यर्थी ऐसे लोगों के झांसे में आ जाते हैं, जो सरकारी विभाग में अपनी पहुंच होने का दावा करते हैं।
किसी भी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन, परीक्षा परिणाम और नियुक्ति से संबंधित जानकारी हमेशा संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत भर्ती पोर्टल से जांचनी चाहिए। केवल किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए नियुक्ति पत्र, मुहर या दस्तावेज को देखकर उस पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
यदि कोई व्यक्ति नौकरी लगवाने के नाम पर पैसे मांगता है, तो उसके द्वारा दिए गए दस्तावेजों की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है। बैंक खाते में पैसा जमा करने से पहले भी पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए।
पुलिस जांच से खुल सकते हैं और राज
फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच जारी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कितने लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देने के लिए किया गया और इस पूरे नेटवर्क में आरोपी के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस यदि मोबाइल, बैंक खातों और बरामद दस्तावेजों की गहराई से जांच करती है तो मामले में नए नाम सामने आ सकते हैं। यह भी पता चल सकता है कि कथित फर्जी नियुक्ति पत्र कहां तैयार किए गए और सरकारी विभागों की मुहरों की नकल किस तरह की गई।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कार्रवाई शुरू कर दी है। आगे की जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
ASP 24 NEWS की अपील: सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले युवा किसी भी व्यक्ति के बहकावे में आकर नौकरी के नाम पर पैसे न दें। नियुक्ति पत्र या परीक्षा परिणाम मिलने पर उसकी पुष्टि संबंधित सरकारी विभाग से जरूर करें। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या फर्जी दस्तावेज की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
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